प्यार {कविता} सन्तोष कुमार "प्यासा"
या किसी कारणवश उदास हो जाता हूँ
जब भी मै तुम्हे सुनता हूँ
या तन्हाइयों में सपने बुनता हूँ
जब तुम्हे देखता हूँ
या खामोशियों में तुम्हे महसूस करता हूँ
मुझे हर बार तुमसे प्यार हो जाता है
गहरा और गहरा !
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