नव जीवन ******** {कविता} ******** सन्तोष कुमार "प्यासा"
ओर से छोर तक बादलों का विस्तारललित फलित मनभावन संसार
गूँज रहा दिग-दिगंत तक कोयल का मधुर स्वर
बह रही दसो दिशाओं में खुशियों की लहर
हो रहा आनंद का उदगम, ये अदभुत क्षण है अनुपम
आशाओं के गगन से सुधा रही बरस
सौहार्द की बूंदों में, मिलकर भीगे हम
लेबल: कविता



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